कॉलेज का वो पहला दिन कुछ याद है तुम्हे..
कुछ याद है मुझे।।
शूरू दिन सब थे अनजान
धीरे धीरे होने लगी दोस्तों से पहचान।।
कुछ चहरे अपने लगे तो कुछ पराय लगे।
किसी को देख कर दिल में एक अजीब सी हलचल मचने लगी
तो वही कैंटीन के किसी कोने में दोस्तों की महफ़िल जमने लगी।।
कभी किसी टीचर ने डांट दिया
पर बुरे वक़्त में हर टीचर ने हमारा साथ दिया।।
खाव्ब तो हमारे थे
पूरा करने में टीचर्स ही तो सहारे थे।।
होस्टल में मस्ती भरी वो रातें
चुप चुप कर मैगी बना कर हम खाते।।
नोट्स पुरे करने के लिए दुश्मन से भी कर लेते यारी
बस यही तो अब याद रह गई सारी।।
जन्मदिन की सुबह की वो दुःख भरी कहानी
जो अब रुलायगी सारे जिंदगानी।।
क्या याद है तुम्हे वो कॉलज के दिन
जहा आकर हमने ज़िन्दगी जीना सीखा
दोस्तों के लिए मरना सीखा
नहीं भूल पाओगे
वो कॉलेज का पहला दिन
और कॉलेज का आखरी दिन।।
यहाँ मैनपाठ की वादिया है। तो जतमई की पहाड़िया है।। बड़े बड़े भैंसे है। तो कही फूलो के उद्यान है।। कभी अनोखे प्रवासी पंछियो का घर है। तो कही नागलोक में साँपो का बसेरा है।। यहाँ बस्तर का दसहरा है। तो वही लाइवलीहुड कॉलज में सुनहरे भविष्य का बसेरा है।। यहाँ माँ का दरबार है । तो कही छत्तीसगढ़ की शान युवाओ के सपनो का सँसार है।। यहाँ की वादियो में कही नक्सलियों की आहट है। तो कही दोस्ती की अनोखी मिसाल है।। यहाँ चक्रधर राजा की अनोखा घराना है। तो यहाँ अभी युवाओ का जमाना है।। यहाँ कुदरत की अनुरूप छठा है। तो काले हिरे से रायगढ़ पटा है।। यहाँ विवेकानंद जी का ज्ञान है। तो वही शहीद वीर नारायण सिंह हुए महान है।। कुछ अच्छे तो कुछ महान ऐसा है हमारा छत्तीसगढ़ महान।।
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