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एक चक्र ज़िन्दगी

खुदा तेरे दिल में भगवान् हमारे मन में न जाने किसने खीच दी लकीर मेरे प्यारे वतन में। ख़ुशी की तलाश में शायद ही कोई जा रहा है हर कोई दुःख मना रहा जीवन के इस क्रूर चक्र में। क्या खोया क्या पाया जीवन में जो मिला वो एक दिन जरूर गवाया। अब जीता सारा जहा। जब संतोष रूपी सुख पाया।

तेरी मुस्कराहट

वो तेरी मुस्कराहट वो तेरी नज़ाकत न जाने कहा खो गई। वक़्त के साथ क्यों तू मुझसे दूर हो गई। तेरे हँसने का इन्तजार करना तुझे खुद से ज्यादा बेइंतहा प्यार करना ।। न होती है अब उन कोनों में कोई गुप्तगु। लगता हमसे खुदा ने छीन ली हमसे रूह। न है कही कोने में पड़े किताब। न बाकि है टूटने के लिए खाव्ब।। राह में जैसे अनजाने मुसाफिर ने साथ छोड़ दिया।। क्या गलती हुई ये तो बता दे जो तूने मुझसे मुँह मोड़ लिया।

हम कवि है

गर्व से कहो हम कवी है पत्थर दिलो में कविता के रंग भरते तन्हाई में अपने कलम के संग रहते ।। बिना सोचे समझे कुछ भी लिख देते है पर उन्ही शब्दों से किसी को खुश कर देते है। न हारने की चिंता न खोने का डर एक कलम ही तो है अपना ज़िन्दगी भर का हमसफ़र।। यु तो ख्वाबो की दुनिया में खोए रहते है यु यादो की दुनिया में डूबे रहते है पर हम कवि है अपने शब्दों में दूसरे एक अहसास उनकी आस पिरोये रहते हैं।।

तुम अनजान हो

तुम उसे सताते हो कोई उसे मनाता है ।। तुम उसे रुलाते हो कोई उसे हँसता।। तुम्हे उसे जलना अच्छा लगता है किसी को उसे हँसना अच्छा लगता। तुम्हे उसकी मोह्ह्बत की कद्र नहीं किसी को उसे रोते हुए देखने का सब्र नहीं। वक़्त बे वक़्त वो तुम्हारे लिए रोती है तुम्हे हँसता देखने की दुआ करती है और तुम्हे उसकी फ़िक्र नहीं एक दिन छीन जायगी तुमसे तुहारी मोह्ह्बत तब न कहना मेरे दोस्त वो बेवफा थी वो दगेबाज़ थी वो तुम्ही थे जो उसको हँसा न सके।। तुम उसके लायक नहीं थे जो तुम उसे अपना न बना सके।।

तेरे प्यार में पागल

माना की मैं पागल था । हा तेरे प्यार में पागल था।। गलती थी मेरी इतनी की तेरी हर एक अदा का कायल था।। न सोचा था मुझे मिले तुमसे ज़िन्दगी भर का साथ। ना सोचा था की मेरे हाथो में हो तेरा हाथ। गलती तो बस इतनी हुई की बिना इज़ाज़त प्यार कर बैठा.। तेरी याद में सुबह शाम गुलजार कर बैठा।। खुदा न करे तेरे पे कोई आँच आए तेरे  को छुने से पहले मौत मेरे में शमा जाए। माना दुबारा हमारी मुलाकात होगी। मेरे न सही किसी और क साथ ज़िन्दगी भर तू साथ होगी।।

वो तेरी मुस्कुराहट

वो तेरी मुस्कराहट वो तेरी नज़ाकत न जाने कहा खो गई। वक़्त के साथ क्यों तू मुझसे दूर हो गई। तेरे हँसने का इन्तजार करना तुझे खुद से ज्यादा बेइंतहा प्यार करना ।। न होती है अब उन कोनों में कोई गुप्तगु। लगता हमसे खुदा ने छीन ली हमसे रूह। न है कही कोने में पड़े किताब। न बाकि है टूटने के लिए खाव्ब।। राह में जैसे अनजाने मुसाफिर ने साथ छोड़ दिया।। क्या गलती हुई ये तो बता दे जो तूने मुझसे मुँह मोड़ लिया।

इंसानियत तू कहा गया

ढूंढ रहा तुझे मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे में। इंसान ही इंसानियत को बेच रहा खुले बाज़ारो में।। अब लड़कियो की चीख सुनाई देती है तहखानों में। अब छोटी लडकिया परोसी जाती है मयखानों में।। यु सुने राहो में लडकिया अब निकलने से डरती है। जन्म लेने से पहले लड़कियां यु कोख़ में मरती है।। क्या हो गया है मेरे प्यारे भारत को क्या हो गया मेरे उस न्यारे भारत को। न है यहाँ लड़कियो की कद्र किसी को। जमाना बदल गया पर न यहाँ है सब्र किसी को।।