माना की मैं पागल था ।
हा तेरे प्यार में पागल था।।
गलती थी मेरी इतनी की तेरी हर एक अदा का कायल था।।
न सोचा था मुझे मिले तुमसे ज़िन्दगी भर का साथ।
ना सोचा था की मेरे हाथो में हो तेरा हाथ।
गलती तो बस इतनी हुई की बिना इज़ाज़त प्यार कर बैठा.।
तेरी याद में सुबह शाम गुलजार कर बैठा।।
खुदा न करे तेरे पे कोई आँच आए
तेरे को छुने से पहले मौत मेरे में शमा जाए।
माना दुबारा हमारी मुलाकात होगी।
मेरे न सही किसी और क साथ ज़िन्दगी भर
तू साथ होगी।।
यहाँ मैनपाठ की वादिया है। तो जतमई की पहाड़िया है।। बड़े बड़े भैंसे है। तो कही फूलो के उद्यान है।। कभी अनोखे प्रवासी पंछियो का घर है। तो कही नागलोक में साँपो का बसेरा है।। यहाँ बस्तर का दसहरा है। तो वही लाइवलीहुड कॉलज में सुनहरे भविष्य का बसेरा है।। यहाँ माँ का दरबार है । तो कही छत्तीसगढ़ की शान युवाओ के सपनो का सँसार है।। यहाँ की वादियो में कही नक्सलियों की आहट है। तो कही दोस्ती की अनोखी मिसाल है।। यहाँ चक्रधर राजा की अनोखा घराना है। तो यहाँ अभी युवाओ का जमाना है।। यहाँ कुदरत की अनुरूप छठा है। तो काले हिरे से रायगढ़ पटा है।। यहाँ विवेकानंद जी का ज्ञान है। तो वही शहीद वीर नारायण सिंह हुए महान है।। कुछ अच्छे तो कुछ महान ऐसा है हमारा छत्तीसगढ़ महान।।
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