Skip to main content

"Clean India green India"

भारत माँ के हम बच्चे
सफाई के मामले में है पुरे कच्चे।।
दुनिया हर मामले में हमारे कदमो में है
सफाई के मामले में हम दुनिया के कदमो में है।।
हम दुनिया के सबसे बड़े गड़तंत्र है
पर अव भी सफाई के मामलो में हम परतंत्र है।।
फ़ाइलओ में हम विश्व का सब से सुंदर शहर दिल्ली को बना जाते है।करोडो ₹ उड़ा जाते है।
पर वास्तव में शहर को जरा भी नहीं साफ़ रख पाते।।
Sawtch bharat अभियान हमारे pm ने तो चला दिया
पर कोई ऐसे जगह बता दो भारत में जिसे हमने पूरा swatch बना दिया।।
मीडिया में आने के लिए एक दिन नेता किसी गन्दी जगह पर झाड़ू लगा जाते है।
दूसरे दिन उसी जगह हम कचरों का भण्डार पाते है।।
खुद किसी जगह को साफ़ नहीं रख पता है।
फिर हम किस हक़ से सफाई के लिए बच्चों को समझाते है।
चलो सब मिल के कसम खाय।
मिल के हम भारत को सवच बनाय।।
हम स्वच्छ भारत बनायँगे।
सपनो में नहीं बल्कि वास्तव में भारत को कचरा मुक्त बनायँगे।।

Comments

Popular posts from this blog

वतन

दो गज की ज़मीं थी कफ़न था तिरंगा।। आँखों में नमी थी ,छाती था खून से रंगा।। हार जीत की न कोई वजह बाकि थी,न था कोई पंगा।। न बाकि था निपटाने के लिए कोई दंगा।। शहीद का साथ जुड़ा , मिल गया साहस का चमन। लौट के न आया फिर मैं, तो रूठ गया ये वतन।। खून बहा कर लिया जो पाकिसातनियो ने मज़ा।। आत्मा मेरी पूछ रही किस बात की मिली मुझे सजा।। न मैंने किसी का भाई मारा न किसी का बेटा।। फिर भी क्यों रो रहा फफक फफक कर मेरा बेटा।। मुझे कुछ नहीं एक जवाब चाहिए।। इस सोई हुई सरकार से एक हिसाब चाहिए।। कौन लौटायगा मेरे परिवार को बीते हुए कल ।। कौन संवरेगा मेरे परिवार का आने वाला कल।। मुझे कुछ नहीं मुझे इन्साफ चाहिए।। बस मेरी मौत का मुझे इन्साफ चाहिए।।अमित पटेल    

बचपन की यादें

घूमते घूमते याद आ गए मुझे बचपन के वो पल। आज की ही मस्ती होती थी,न चिंता थी खुदा जाने क्या होगा कल।। रोते थे तो सर पे होता था माँ का साया । बचपन में सब के लाडले होते थे,भले ही बड़े होने पर पैसो ने बना दिया उनको पराया।। ना  वक़्त की कमी थी;ना थी खाने की चिंता। अगर अच्छे संस्कार ना होते तो अभी इतना सूंदर भविष्य बनता।। सुबह की वो भागा दौड़ी , जब माँ हमें छोड़ आती आंगनबाड़ी। रोते थे वापस आके सोने के लिए मिलती माँ की फूलो से भरी आँचल वाली प्यारी से साड़ी।। याद आते है बचपन की वो पल जब खेला करते थे सबके साथ लुका छिपी। लूडो खेलते अपनी चाल के साथ की वो थोड़ी बईमानी।। बचपन की वो आज़ादी ,वापस अगर आ जाए तो कुर्बान कर दू उसपे सारी ज़िंदगानी।। याद आते है वो तलाब में नहाना । रात को किसी के भी घर पे खाना ।। याद आते है... मौसी की प्यारी सी फटकार। नानी की ढेर सारी दुलार।। मामा की गुस्सों का डर। चाचा को जो होती हमारी फिकर।। याद आ गया बचपन का वो यार । मस्ती से भरा बचपन का पिटारा।। अपनों का सहारा । बचपन की सारी मस्तियाँ। याद आ गया दोस्त के पैर में किया वो वो दर्दनाक